Posted by: Sakhi on: January 3, 2008
एक
दिन सुबह सुबह गधुभाई कि शरारतों से तंग आकर उनकी माँ ने उन्हें खूब डांटा तो वोह रोते रोते गए स्कूल। वहाँ भी उन्हें खूब डांट पड़ी क्योंकी मस्ती करने के चक्कर मे उन्होने पढाई तो कि ही नही थी!अब
गधुभई को बहुत गुस्सा आ गया। तो वो जंगल छोड़कर भाग गए। अकेले!और
गए कहाँ? शहर! पर यहाँ आके देखा तो ये बड़ी बड़ी इमारतें थी, चौडी चौडी सड़कें थी और चारों और गाडियाँ ही गाडियाँ थी…वोह तो यह सब देख कर घभरा ही गए। पर अब क्या? घर जाने का रास्ता तो वोह भूल गए! तो वोह लगे रोने …उतने
में एक इंसान वहाँ से गुजार रहा था, उसने गधुभाई को रोते हुए देखा। उसने पूछा कि तुम क्यों रो रहे हो? तो गधुभाई ने अपनी सारी कहानी बता दी। तो इंसान बोला, “अरे तू रो मत, मेरे साथ चल, में तुम्हे अच्छा खाना दूंगा, अछे से रखूँगा और हम बहुत मज़ा करेंगे।” यह सुनकर तो गधुभाई बहुत खुश हो गया और इंसान के साथ चल दिया!पर
वह इंसान कैसा था? बहुत चालाक था। जैसे ही वो दोनो इंसान के यहाँ पहुंचे कि तुरंत ही इंसान ने गधुभाई को एक जगह पर रस्सी से बाँध दिया और खाना भी नहीं दिया। अब वोह इंसान गधुभाई से रोज़ बहुत काम करवाने लगा। उनको वोह अच्छे से खाना भी नहीं देता था और ठीक से सोने भी नहीं देता था।अब
गधुभाई को अपने जंगल कि, अपनी माँ कि, अपने दोस्तों कि याद आने लगी। वोह रोज़ रोते रहते थे, पर अब रोने से क्या होगा?एक
दिन एक बंदर दादा जंगल से शहर में आये। वोह jab घूम रहे थे तब उन्होने किसी कि रोने कि आवाज़ सुनी। उनको लगा कि यह आवाज़ तो जानी पह्चानी सी है। तो वह आवाज़ कि और चल दिए, यह देखने के लिए कि कौन रो रहा है! वहाँ क्या देखते हैं? यह तो गधुभाई है! बन्दर दादा ने उन्हें बहुत डांटा। फिर कहा कि अगर तुम सबसे माफ़ी मांगो गे और वादा करोगे कि आगे से ऐसा कुछ नहीं करोगे तो ही में तुम्हे यहाँ से छुड़ाकर ले जाऊँगा। गधुभाई ने रोते बिलकते बोला कि में अच्छा बच्चा बनके रहूंगा, माँ कि हर बात मानुगा और अच्छे से पढूंगा…किसी को तंग नहीं करूंगा। तुरंत ही बंदर दादा ने रस्सी खोल दी और दोनो भागने लगे।उतने
में इन्सान आ पहुंचा और ज़ोर से आवाज़ लगाई कि गधुभाई कहाँ जा रहे हो? पर अब गधुभाई रुकने वाले थे ?I think that’s appreciation!
January 7, 2008 at 3:48 am
HE HE HI HI!!!!!